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गरिमा सिकारिया पर लगे अविश्वास को अवैध बता हाइकोर्ट ने किया रद्द, पद पर किया बहाल

अविश्वास लगाने, बैठक बुलाने व पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने बताया पूर्णतया अवैधानिक

*–उप सभापति कयूम ने एक अवैध वोट को अविश्वास के पक्ष में गिनकर सभापति गरिमा को पद से हटाया था*

*–प्रेसवार्ता में बोलीं गरिमा करोड़ों रुपयों की बन्दरबांट के लिए गिरोह बना कर लगाया गया था अविश्वास*

*–रिकॉउंटिंग होने पर फर्जीवाड़े की पोल खुल जाने की डर से कपड़े उतार विरोधियों ने किया था नंगा नाच*

बेतिया मोहन सिंह। आठ माह से भी ज्यादा चले विचारण के बाद नगर परिषद (अब निगम) की सभापति गरिमा देवी सिकारिया पर अविश्वास लगाने, विशेष बैठक बुलाने और अविश्वास को पारित करने की पूरी प्रक्रिया को हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाले बेंच ने अवैधानिक बताकर रद्द करते हुये उन्हें पद पर पुनः बहाल कर दिया है। हालांकि प्रोन्नत नगर निकायों के बोर्ड को सरकार द्वारा भंग कर देने के एक अन्य मुकदमे का फैसला आने के बाद ही गरिमा देवी सिकारिया अपनी कुर्सी पुनः सम्भाल पाएंगीं। हाईकोर्ट का ऑर्डर जारी होने के बाद शुक्रवार को आहुत एक प्रेस वार्ता में श्रीमती सिकारिया ने कोर्ट के आदेश की प्रति जारी करने के साथ उपरोक्त फैसले की जानकारी दी है। श्रीमती सिकारिया ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है परन्तु पराजित नहीं। लेकिन, करीब 11 माह की अथक लड़ाई के बाद मिली न्याय की जीत वास्तव में नगर निगम क्षेत्र के समस्त जनता जनार्दन की जीत है। प्रेसवार्ता के माध्यम से मीडिया के साथ नगर निगम की जनता के लिये भी गरिमा देवी सिकारिया ने अपील जारी करते हुये अपने विरुद्ध षड्यंत्र का विस्तार से खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वे एक विशेष रोडमैप और दूरदर्शिता पूर्वक बीते चार साल से नगर निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में अपने तन, मन, धन से लगी रही हैं। इसको लेकर मिले जनता जनार्दन के अपार स्नेह और सरकारी राशि के लूट खसोट पर काफी हद तक रोक से नाराज असामाजिक तत्वों ने मेरा विरोध करने में नियम कानून व सामाजिक मर्यादा तक कि सारी सीमाएं लांघ दी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के इस फैसले से मुझे अपनी सेवा जारी रखने का रास्ता फिर साफ हो गया है। उन्होंने अपनी पीड़ा साझा करते हुये बताया कि विकास विरोधी पार्षदों यथा नगर में वार्ड 28 के पार्षद मोहम्मद कयूम अंसारी, वार्ड 7 के संजय उर्फ छोटे सिंह, वार्ड 14 की मुन्नी खातून, वार्ड 3 के सुजीत कुमार मंटू, वार्ड 30 के जवाहिर प्रसाद, वार्ड 34 की रजिया बेगम, वार्ड 33 की कृष्णा देवी, वार्ड 39 के रमाकांत महतो, वार्ड 12 की नाजिया प्रवीण, वार्ड 1 की हसन तारा खातून, वार्ड 31 की सविता देवी, वार्ड 4 के अश्विनी प्रसाद, वार्ड 18 सुनैना देवी और वार्ड 36 की रूही सिंह आदि ने अविश्वास लगाकर और अपनी गंदी सोच से बीते 28 दिसंबर को पारित अविश्वास के प्रस्ताव को पटना हाईकोर्ट के चिफजस्टिस की अध्यक्षता वाले डबल बेंच ने ख़ारिज कर दिया है। अपने अपने वार्ड व सम्पूर्ण नगर निगम क्षेत्र में तब जारी सर्वांगीण विकास के दुश्मनों द्वारा षड्यंत्रपूर्वक लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को माननीय कोर्ट ने अवैधानिक और अनुचित करार दिया है। दुर्भाग्यवश नगर पार्षद बने विकास के उपरोक्त दुश्मनों एवं मेरी सख्ती के कारण लूट की छूट पाने के लिये बेचैन पार्षद और उनके आकाओं के षड्यंत्र के द्वारा बीते 16 दिसंबर को अविश्वास तब लाया गया जब मैं नगर के सर्वांगीण विकास को ले माननीय उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री तारकिशोर प्रसाद जी के स्तर से आयोजित सरकारी बैठक में शामिल होने के लिए पटना में थी। इसके बाद मेरी ही मदद से उपसभापति बने और अविश्वास से बचने वाले कयूम अंसारी एवं विरोधी पार्षदों के द्वारा अवैध और अनाधिकार पूर्वक अविश्वास पर कथित बहस और मतदान के लिये 28 दिसंबर की तिथि निर्धारित कर दी गई। इस षड्यंत्र के भी नाकाम हो जाने और पार्षदगण द्वारा मेरे विरुद्ध अविश्वास का प्रस्ताव खारिज कर दिए जाने के बाद और मेरे बेतिया से बाहर होने पर बैठक की अध्यक्षता कर रहे कयूम अंसारी ने अपने वैधानिक पद का निर्लज्जता पूर्वक दुरपयोग किया और मेरे पक्ष में पड़े मत को मेरे विरुद्ध गिनवा कर मुझे जबरन पराजित घोषित कर दिया। इसका विरोध करते हुये मतपत्रों की दुबारा गिनती की मांग कर रहीं दर्जनभर महिला पार्षदगण के सामने और नगर आयुक्त के कार्यालय कक्ष में ही उपरोक्त षड्यंत्रकारी पार्षदों पुत्र-पति रिंकी गुप्ता, मोहम्मद एनाम, केशव राज सिंह और पंकज चौधरी महिलाओं के सामने नंगे हो गए और वोटों की रिकाउंटिंग का गालीगलौज और गुंडागर्दी पूर्वक विरोध करने लगे। इसके विरोध में डीएम के पास पहुंच कर पार्षदगण के रिकाउंटिंग की गुहार लगाने चले जाने पर कयूम अंसारी ने बैलेट्स को आनन फानन में सील करवा दिया। इसका साक्ष्य मेरे द्वारा प्रस्तुत करने पर हाईकोर्ट ने रिकाउंटिंग का आदेश पारित कर दिया। लेकिन न्याय की जीत के विरोधी वार्ड 4 के पार्षद अश्विनी प्रसाद ने रिकाउंटिंग के विरोध में डबल बेंच के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर कर दी। फिर वार्ड 7 के पार्षद संजय उर्फ छोटे सिंह ने भी नये सभापति का चुनाव कराने की याचिका दायर कर दी। जिसपर कोर्ट ने तत्काल सुनवाई पर रोक लगा कर के षड्यंत्रकारी लुटेरे पार्षदों के मंसूबों पर पानी फेर दिया था। वही अश्वनी प्रसाद के द्वारा दायर याचिका पर विचारण प्रारंभ करने के साथ ही मेरे अधिवक्ता की अपील पर सरकारी राशि की लूट खसोट की आशंका को लेकर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली माननीय हाई कोर्ट के पीठ ने षड्यंत्रपूर्वक कार्यकारी सभापति बने कयूम अंसारी के वित्तीय अधिकारों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी, जिससे बड़े लूट खसोट पर रोक लग सकी। हाईकोर्ट में महीनों चले विचारण के बाद भी शहर के विकास विरोधी पार्षद मेरे विरुद्ध एक भी सबूत पेश नहीं कर पाए। अब वार्ड 4 के पार्षद अश्विनी कुमार की याचिका को निष्पादित करने के साथ ही माननीय न्यायालय ने मेरे विरूद्ध लाये गये अविश्वास के प्रस्ताव ग़ैरवैधानिक करार कर दिया है। लेकिन अंततः न्याय की जीत पर आज बेहद मुझे खुशी के साथ मेरे मन मे पीड़ा भी कम नहीं है। क्योंकि पूरे एक साल तक शहर के विकास के विरोध में नंगा नाच के साथ करोड़ों की सरकारी राशि का बेरोकटोक बंदरबांट करने वाले उपरोक्त सभी पार्षदों के एक गिरोह ने नगर निगम के केवल दो ही सैरात (बस स्टैंड और माल बाहकों से टैक्स वसूली) की ही बंदोबस्ती होने दी। मीना बाजार, शीतला माई मार्केट, छोटा रमना कौड़ी वसूली और सोवाबाबू चौक बाइक स्टैंड समेत लाखों की वसूली वाले करीब डेढ़ दर्जन सैरातों की विभागीय व सरकारी वसूली के नाम पर कब्जा कर लिये हैं। बीते एक साल में उपरोक्त पार्षद व इनके शागिर्दों को मिली लूट की छूट में साफ सफाई का भी बंटाधार हो गया है। जिसके कारण सौ साल से भी अधिक पुराने बेतिया शहर के इतिहास में पहली बार इस बार की बरसात में भारी जलजमाव के कारण बोट चलने की नौबत आयी। दर्जनों मुहल्ले के लाखों की आबादी को कोरोना त्रासदी जैसे जानलेवा संकट काल में गंदगी, सड़ांध और अनेकों बार का जल जमाव के साथ नारकीय जीवन झेलने को मजबूर होना पड़ा। अतः इस स्थिति के जिम्मेदार एक एक विकास विरोधी पार्षद को अगर जनता जनार्दन ने अगले चुनाव में सबक नहीं सिखाया तो आगे भी आपकी गरिमा और किसी अन्य निर्दोष के साथ भी षड्यंत्र होता रहेगा। इसलिये बेतिया नगर निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के मेरे सपने को दृढ़ता पूर्वक और ईमानदारी से साकार होने के लिये अगले चुनाव में उपरोक्त पार्षदों की राजनीतिक और सामाजिक हार सुनिश्चित करने में आपको अपनी सेवा में समर्पित अपनी इस गरिमा देवी सिकारिया के साथ खड़ा होकर इनकी सजा सुनिश्चित करने में मेरा साथ देना है।
*जय हिंद,जय बेतिया, जय जनता जनार्दन।*
मौके पर पूर्व सभापति जनक साह, वार्ड 8 मनोज कुमार, वार्ड 10 श्रीमती देवी, वार्ड 15 कैसर जहाँ, वार्ड 16 शकीला खातून, वार्ड 17 अरुण कुमार, वार्ड 19 जरीना सिद्दीकी, वार्ड 21 मधु देवी, वार्ड 22 शहनाज खातून, वार्ड 26 दीपेश सिंह, वार्ड 27 रीता रवि इत्यादि निवर्तमान समर्थक पार्षद मौजूद रहे।

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