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हिंदी दिवस के अवसर पर प्रथम सत्र में रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय DCके सभागार में सम्मान समारोह का आयोजन

चम्पारन साहित्य संस्थान के संयोजक दिवाकर राय एवं संस्थाद्वय के प्रवक्ता डॉ जगमोहन कुमार ने यह बताया कि कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र कुमार 'शाहबादी' का भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के तीन गैर-सरकारी सदस्यों में नामित होना कॉलेज सहित पूरे राज्य का सम्मान है

बेतिया मोहन सिंह साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाद्वय ‘अनुराग’ एवं ‘चम्पारन साहित्य संस्थान’ के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर प्रथम सत्र में रामलखन सिंह यादव महाविद्यालय DCके सभागार में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। चम्पारन साहित्य संस्थान के संयोजक दिवाकर राय एवं संस्थाद्वय के प्रवक्ता डॉ जगमोहन कुमार ने यह बताया कि कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र कुमार ‘शाहबादी’ का भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के तीन गैर-सरकारी सदस्यों में नामित होना कॉलेज सहित पूरे राज्य का सम्मान है। इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रो. राजेश्वर प्रसाद यादव ने कहा कि डॉ. शाहाबादी का चयन हिंदी जगत के लिए गर्व की बात है। इस मौके पर अनुराग के वरीय सदस्य अरुण गोपाल चंद्रिका राम, प्रशांत सौरभ, कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. अभय कु. सिंह, डॉ. संजय यादव, कॉलेज के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों सहित छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

वहीं द्वितीय सत्र में स्थानीय महाराजा पुस्तकालय में संस्थाद्वय के सदस्यों की कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई। जिसकी अध्यक्षता कर रहे पं. चतुर्भुज मिश्र ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि चिंता चिंतन चातुरी, मंथन मंगल मोद। मोहक मधुमय मधुरतम, काव्य प्रिया की गोद। संचालन कर रहे संस्थाद्वय के प्रवक्ता डॉ. जगमोहन कुमार ने कहा कि राजभाषा बढ़े हर यतन कीजिए। जो जतन कीजिए प्राणपन कीजिए। सीधी सुंदर सरस आत्मा राष्ट्र की। हिन्दी भाषा हमारी नमन कीजिए। अरुण गोपाल ने कहा कि जहाँ में नफरतें ही बाँटता है। जो बोना ही नहीं था काटता है। अमन के पोस्टरों को फाड़ डाला। कोई आ जाए भी सो साटता है। दिवाकर राय ने कहा कि मन में हिम्मत तन में बल हो। मानस पर्वत सा अविचल हो। बुद्धि तेज शिवाजी जैसी। कर्मों पर अपना संबल हो। भूपेन्द्र शेष ने कहा कि किसी ने मुझसे पूछा आप कौन हैं? मैं अपने विशाल भारत का अदना किसान हूँ। सियासत के जूते से सना पिसान हूँ। आभास झा ‘युवा’ ने कहा कि हिन्दी की बिन्दी चमक रही भारत माता के भाल पर। पूरी दुनिया झूम रही हिन्दी गीतों के ताल पर। चन्द्रिका राम ने कहा कि कविता पंचतत्वों की भाँति शाश्वत है। सृष्टि की ताकत है। तब अब और तब का हलफनामा है। प्रशांत सौरभ ने पढ़ा कि हम सब हिंदी के प्रेमी, एक यही अभिलाषा। हम सब का है गौरव ये, अब बने राष्ट्र की भाषा। प्रीति प्रकाश ने कहा कि दिनभर काम करके वो चाय पर मिलती हैं। शाम के धुंधलके में लड़कियाँ ख्वाबों पर बात करती हैं। धन्यवाद ज्ञापन आलोक कुमार बरनवाल ने किया।

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