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नगर निकाय-सफाईकर्मियों की न्यायपूर्ण हड़ताल की मांगों को जनहित में तत्काल माने सरकार: माले

गन्दे और जोखिमभरे कामों में लगे सफाईकर्मियों के प्रति असंवेदनशील है भाजपा-जदयू सरकार विधायक

बेतिया मोहन सिंह

भाकपा-माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता विगत कई दिनों से जायज मांगों को लेकर नगर निकाय- सफाईकर्मियों की चल रही हड़ताल का समर्थन करने नगर परिषद बेतिया पहुँच कर पार्टी की ओर से एकजुटता जाहिर किया!
आगे उन्होंने कहा कि हड़लाती सफाईकर्मियों के प्रति सरकार का रवैया बेहद चिंताजनक और असंवेदनशील है. सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बात नहीं कर रहा है. जबकि हड़ताल की वजह से पुरा बिहार की स्थिति बेहद ही नारकीय हो गई है. सड़कों पर कूड़ों व गंदगी का अंबार लग चुका है. राज्य के अन्य जिलों की हालत इससे भी बदतर हो चुकी है. इसलिए हमारी मांग है कि राज्य सरकार जनहित में तत्काल हड़ताली कर्मियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और हड़ताल को खत्म करवाने के रास्ते खोजे.

आगे कहा कि बिहार के समस्त निगम व निकायों में सफाई व अन्य कर्मियों (ग्रुप डी) के पदों को समाप्त कर आउटसोर्स करने के आदेश को वापस लेने तथा इन पदों पर पूर्व से कार्यरत दैनिक, ठेका व आउटसोर्स कर्मियों की सेवा का नियमित करने; स्थायी पद सृजित कर आबादी के अनुरूप सफाई व अन्य कर्मियों की नियुक्ति; आउटसोर्स, ठेका व कमीशन प्रथा की समाप्ति; दैनिक कर्मियों की सेवा का नियमितकरण व समान काम के लिए समान वेतन अथवा सामान्य वर्ग को न्यूनतम 18000 रु. मासिक की व्यवस्था सहित अन्य 12 सूत्री मांगों को उचीत ठहराया
आगे कहा कि यह कहीं से उचित नहीं है कि पदों को खत्म कर आउटसोर्स किया जाए. आज दिल्ली से लेकर पटना तक की सरकारें इसी तरह की मजदूर-कर्मचारी विरोधी नीतियों पर चल रही है और मजदूरों व कर्मचारियों के पहले से प्राप्त अधिकारों को खत्म करने में लगी हुई है.

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