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जीवन के हर मोड़ पर अनेक गुरुजन की प्राप्ति का सुवसर प्राप्त होता हैं।

प्रारम्भिक जीवन के गुरुश्रेष्ठ अपने माता पिता के निर्देशन में हम अपने जीवन की शुरुआत करते हैं।

बेतिया मोहन सिंह:- गुरु पूर्णिमा के परम पवित्र अवसर आज लाल बाजार स्थित पातालेश्वर मंदिर परिसर में सनातन गुरु आचार्य चंडेश्वर शर्मा जी, पंडित आशुतोष शर्मा जी, पंडित प्रदुमन मिश्रा जी तथा नवेन्दु चतुर्वेदी जी को अंग वस्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।

 

आज मुझे अनुभूति हुई कि जीवन के हर मोड़ पर अनेक गुरुजन की प्राप्ति का सुवसर प्राप्त होता हैं।जैसे कि अपने प्रारम्भिक जीवन के गुरुश्रेष्ठ अपने माता पिता के निर्देशन में हम अपने जीवन की शुरुआत करते हैं।माता-पिता हमें जीने का ढंग सिखाते हैं।

 

उसी प्रकार स्कूल-कॉलेज में पढ़ाने वाले गुरु हमें शिक्षा देते हैं। इस प्रकार हर वो व्यक्ति जो हमें कुछ जान देता हैं जिसके कारण हमारी जिंदगी सार्थकता के समीप पहुंचती है, वे सभी मान्यवर हमारे गुरु या गुरु सदृश ही होते हैं। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। ग्रन्थों में वर्णित परिभाषा के अनुसार गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश। आज के पुण्यवान और पवित्र दिवस पर मैं अपने समस्त गुरुजन का वंदन अभिननन्दन करतीं हूं।

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