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जंगली भैंसा के झुंड ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया किसानों में रोष

इनदिनों जंगली जानवरों के डर के साये में जीने को मजबूर हो चले हैं जंगलों के तलहटी में बसे ग्रामीण व किसान ।

बगहा । ब्यूरो नसीम खान ‘क्या’।
इनदिनों जंगली जानवरों के डर के साये में जीने को मजबूर हो चले हैं जंगलों के तलहटी में बसे ग्रामीण व किसान । एक तरफ हिंसक जानवरों से जानमाल का खतरा तो दूसरी तरफ शाकाहारी जानवरों से लहलहाते फसलों को भारी नुकसान।किसान फरियाद करे तो कहां करें । बतादें की हरनाटांड़ के आसपास बाघ ग्रामीणों पर हमलाकर मौत के घाट उतार रहा है तो दूसरी तरफ जंगली जानवर फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं । चंपापुर गोनौली पंचायत के मुखियापति लक्ष्मीनारायण महतो ने बताया कि वीटीआर कक्ष संख्या टी-3-4 से सटे गोरार गांव के इलाके में बसे किसानो के खेतों की फसलें जंगली भैसों के द्वारा रौंद कर बर्बाद किया जा रहा है । खेत मे धान की फसल लगी हुई है,जिसे जंगली भैसों के झुंड रात के पहर चर कर बर्बाद कर रहे है । हालांकि खेतों की रखवाली के लिए किसान खेतों में मचान बनाकर कर रहे हैं लेकिन जंगली भैसों के झुंड के आगे बेबस हो जा रहे हैं । वन विभाग को इसकी सूचना दे गई है । वनकर्मी खेतो का मुआयना भी किया है लेकिन पिछले 3 वर्षों से जंगली जानवरों के द्वारा पहुंचाई गई नुकसान की भरपाई अबतक वन विभाग के द्वारा पूरी नहीं की गई है । समाजसेवी व किसान नेता केदारनाथ क़ाज़ी ने बताया कि गेंडा व दूसरे जंगली जैसे सुअर,हिरण आदि जानवरों से फसलों को हुई नुकसान की मुआवजे की राशि पिछले 3 वर्षों से लंबित है और इधर बराबर खेतों को जंगली जानवर नुकसान पहुंचा रहे है । छोटे किसान जो पूरी तरह से खेती पर ही निर्भर है मुआवजे की राशि देर से मिलने से आहत हो चले है । वन विभाग जल्द कोई निदान निकाले । बतातें चलें कि आदमख़ोर बाघ से डरे सहमे ग्रामीण व किसान अब जंगली भैसों के आतंक से त्रस्त व आहत हो वन विभाग के खिलाफ आंदोलन के मूड में दिख रहे है ।

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